गुनाह — एक आत्मा की नज़र से
“बोल देने से गुनाह कम नहीं हो जाता,
पर कभी-कभी इंसान के पास माफ़ी माँगने के अलावा कोई शब्द नहीं बचता।”
गुनाह... यह शब्द सुनने में जितना छोटा लगता है, आत्मा पर इसका बोझ उतना ही गहरा होता है। हर गुनाह जान-बूझकर नहीं किया जाता। कुछ गुनाह इंसान से परिस्थितियाँ करवा देती हैं, कुछ उसकी नासमझी का परिणाम होते हैं और कुछ ऐसे होते हैं, जिनका एहसास उसे बहुत देर से होता है।
लेकिन वजह चाहे जो भी हो, हर गलती अपने पीछे एक कहानी छोड़ जाती है और हर गुनाह आत्मा पर