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श्रीगीतगोविन्दम् : महाकवि श्री जयदेव की अमर कृति, जिसने प्रेम को भक्ति का स्वर दिया ।।
यह केवल संस्कृत का एक महान काव्य नहीं है, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक चेतना का मधुरतम संगीत है। इसमें श्रीराधा और श्रीकृष्ण के दिव्य प्रेम का अलौकिक चित्रण है ।
ज्ञान से हम किसी ग्रंथ को समझते हैं,
लेकिन श्रद्धा से हम उसे जीना सीखते हैं।
शायद इसी कारण श्रीगीतगोविन्दम् आज भी केवल पढ़ा नहीं जाता,
बल्कि गाया, जिया और अनुभव किया जाता है।"
कुछ पुस्तकें पढ़कर समाप्त हो जाती हैं।
पर श्रीगीतगोविन्दम् पढ़ने के बाद एक नई यात्रा आरम्भ होती है—
प्रेम की, भक्ति की और आत्मा की।
Anu goel
Jul 158 min read


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